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राजनीति

ताक़त का गुरूर है, कुछ पाने का सुरूर है

कौन किसका भेद है, ये राजनीति का खेल है

 

वादों की ये गूँज है, जनता ही अब उम्मीद है

कौन कितना जरूरी है, ये जानना तुम्हे ज़रूरी है

 

धर्म के नाम पर फिर गुमराह जाना आम होगा,

सत्ता के इस खेल में तुम्हारा ही इस्तेमाल होगा

 

हाथ जोड़े जाएंगे, दर्द पर उनका वार होगा,

राजनीति के खेल में फिर उनका ही राज होगा

 

लाल – हरे रंग मे इंसानियत को तोला जाएगा,

विकास को छोड़, फिर यही पर्दे पर दिखाया जाएगा

 

आम बनकर फिर आम को ही लूटा जाएगा,

हर गरीब का घर होगा, कहकर खरीदा जाएगा

 

खोल लेना आंखें , वक़्त तुम्हारा आएगा

कदम ही तुम्हारा अब परिवर्तन लाएगा

 

हर सवाल का जवाब होगा, झूठ का पर्दा आर पार होगा

धर्म को छोड़कर, विकास का ही फिर प्रचार होगा

 

क्या तुम्हारी राय है, प्रत्येक से सवाल होगा

मर्यादा का मान रखना, ये कहना भी सवाल होगा

 

कर्म तुम कर देना, गलत को तुम बदल देना

खुशहाल रहे तिरंगा हमेशा, उसकी शान को तुम बढ़ा देना

राजनीति के इस खेल में, कुछ ऐसा तुम कर देना!!

Sonam is pursuing her masters in MSC chemistry from Delhi Technological University.
Sonam Yadav
Writer

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