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ज़रा सी ज़िन्दगी

ज़रा सी ज़िन्दगी में व्यवधान बहुत हैं,
तमाशा देखने को यहाँ इंसान बहुत हैं ।
मुश्किल घड़ी में कोई सामने नहीं आता,
मददगार कम और सलाहकार बहुत हैं ।
ज़िंदा लाशों को चलते देखा है मैंने,
यहाँ दिलों में बसे शमशान बहुत हैं ।
ख्वाहिशें जलाकर ख़ाकc कर दी अपनी,
इरादे फिर भी बलवान बहुत हैं ।
दौड़ते फिरते हैं न जाने क्या पाने को,
लगे रहते हैं जुगाड़ में,परेशान बहुत हैं ।
न करना भूल कर भी भरोसा किसी पर ,
यहां हर गली में बेईमान बहुत हैं।
इंसानियत मर चुकी है दुनिया में,
कहने को यहाँ इंसान बहुत हैं ।

Shalini Sharma has completed her graduation from Bharat Ayurved medical college in 2020. She likes to read and write novels and poems, and has a small collection of them. She is looking forward to practice medicine and continue writing novels and poems.
Shalini Sharma
Writer

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