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आवाज

बारिश की बूंदों सी, बादलों की गर्जन सी

कभी धीमी, कभी हवा सी तेजी मुझमे

मैं हूँ एक आवाज, अंतर्मन की

 

कभी कहती तुमको, कभी चुप हो जाती

दबी सी मैं, एक आवाज अंतर्मन की

पूछते लोग, क्यु खामोश तुम

चीखती सी, झटपटाती सी

मैं एक आवाज, अंतर्मन की

 

कभी शर्म, कभी डर ने

कभी समाज ने, दबाया मुझको

कभी रूढ़िवादी सोच ने

दबती सी, मैं आवाज अंतर्मन की

 

रूह की मैं साथी हूँ, जानती सारी बाते हूँ

मैं हूँ एक आवाज अंतर्मन की,

 

तोड़ के सारी बेड़ियाँ, पंछियों सा चहचहाना है

महफिलों में गूँजना, चेहरों पर मुस्काना है

मैं एक आवाज अंतर्मन की, दुनिया को बतलाना है!!

Sonam is pursuing her masters in MSC chemistry from Delhi Technological University.
Sonam Yadav
Writer

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