गुरु

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गुरु

कदम तो हमारे थे,
चलना आपने सिखाया,
अंगुली तो हमारी थी,
उसे पकड़कर आगे आपने बढ़ाया,
निगाहें तो हमारी थीं,
रास्ता आपने दिखाया,
ख्वाब तो हमारे थे,
उसमें आसमां छूने की ख्वाहिश आपने जगाई,
मन तो हमारा था,
उसे हौसलों की उड़ान भरना आपने सिखाया,
आपने ही तो हम नादान परिंदों को,
उस नीड़ से उड़कर,
आसमां नापने की हिम्मत दी,
ना सिर्फ हिम्मत दी,
हर डगमगाते कदम पर साथ दिया आपने!
आपने ही तो इस अनगढ़ी मिट्टी में
ज्ञान का पानी डालकर
चाक पर उसे गढ़ आकार दिया!
आपने ही तो इस स्वर्ण को
और तपाकर
निखार दिया!
आपने ही तो इस बीज में
खाद डालकर
अंकुरित कर दिया!

Shruti Agarwal is a final year B.A Hindi student from Bareilly. She is studying in Miranda House, Delhi University and she aims to become a professor in future.
Shruti Agarwal
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