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बन्धन

विवाह के नाम पर घबरा जाती है,

 वो एक नादान लड़की,

अपने ही घर से भाग जाती है,

ज़माना ढूँढता है उसे दर – ब-दर,

ख़ुद मे ही कहीं वो खो जाती है,

एक सपना है जो उसे पुकारता है,

अपना ही घर उसे सताता है,

समाज के तानों पर अपनों का प्रहार,

हर रोज उसे तड़पाता है,

फ़िर गैर घर जाने का खौफ उसे रुलाता है,

उम्र बढ़ रही है इसकी,

 फिर कौन इसको चाहेगा,

यही सवाल बार बार ये ज़माना उठाता है,

घर गयी तो घर की ही रह जाएगी,

यही ख्याल उसे रात भर  जगाता है,

कंधों से बोझ उतरेगा, जीवन इसका  ही सवरेगा,

माँ बाप को हर रोज ये ज़माना समझाता है,

उम्र का ख्याल करो, सपनों का बहिष्कार करो,

तुम लड़की हो, लड़की की तरह व्यवहार करो,

बन्धन में बंध जाओ, वक़्त से पहले सम्भल जाओ,

जवान लड़की हो अंधेरे से पहले घर जाओ,

ख़ुद को महान समझता है, जीवन पर उसके अपना अधिकार रखता  है,

विवाह को ही उसके जीवन का सार कहता है

तुम लड़की हो,

तुम लड़की हो,

हर बात पर यही बात

बार बार कहता है!!!

Sonam Yadav is from Haryana She is a student of DTU
Sonam Yadav
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